एक देश के प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारियाँ क्या होती हैं? क्या यह देश की समृद्धि नहीं है? क्या यह देश में उद्यमिता को बढ़ाना नहीं है? क्या यह देश में शिक्षा को बढ़ाना नहीं है? क्या यह देश की मुद्रा को मजबूत बनाना नहीं है? वर्तमान प्रधानमंत्री बार-बार कहते हैं कि देश की GDP बढ़ रही है, लेकिन यह केवल देश की बड़ी जनसंख्या और उपभोग की वजह से है — जिससे विदेशी कंपनियाँ हमारे देश से कमाकर अपनी मुद्रा को मज़बूत बना रही हैं, जबकि हमारी रुपये की कीमत गिरती जा रही है और देश की उद्यमिता घटती जा रही है।
हमने भारत के चुनाव आयोग को पत्र लिखा था, जिसमें IFWC के CEO और अध्यक्ष श्री आशीष सचदेवा को 2024 के चुनावों में नामांकन हेतु पंजीकृत करने की मांग की गई थी — लेकिन हमें कोई उत्तर नहीं मिला। हमने IFWC को एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत करने के लिए भी पत्र भेजा था — लेकिन फिर भी कोई उत्तर नहीं मिला। हमने चुनाव आयोग से सभी चुनावी दलों का घोषणापत्र माँगा — लेकिन वह भी हमें नहीं दिया गया। क्या चुनाव आयोग भारत में चुनावों को निष्पक्ष रूप से नहीं चला रहा?
प्रधानमंत्री की ज़िम्मेदारियाँ:
1. देश की समृद्धि: वर्तमान प्रधानमंत्री वित्त और अर्थशास्त्र में प्रशिक्षित नहीं हैं, और जब वे कहते हैं कि GDP बढ़ रही है, तो वे यह नहीं समझते कि मुद्रास्फीति (inflation), व्यापार घाटा (trade deficit), और वित्तीय असंतुलन गरीबी के कारण नहीं, बल्कि गरीबी के परिणाम हैं। वर्तमान प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को देश में लाकर टैक्स से देश चलाने में लगे हैं, जबकि वे देश में उद्यमिता बढ़ाने में असमर्थ हैं। यही वजह है कि रुपया कमजोर हो रहा है और देश में गरीबी बढ़ रही है।
2. देश में उद्यमिता को बढ़ाना: देश में शिक्षित लोगों के लिए कोई उद्यमिता निधि नहीं है। कोई उद्यमिता नीति नहीं है जिससे देश में रोजगार और अवसर पैदा हों। आज हर क्षेत्र में 60% से ज़्यादा ब्रांड विदेशी हैं — चाहे उत्पाद हों या सेवाएँ — जिससे हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और गरीबी बढ़ रही है।
3. देश में शिक्षा को सुधारना: भारत में महानगरों, शहरों और गाँवों में शिक्षा का स्तर एक जैसा नहीं है। गाँवों में लोग आज भी कंप्यूटर के महत्व और ग्लोबल अर्थव्यवस्था से जुड़ने के अवसरों से अनजान हैं। हमारे देश के अधिकांश छोटे उद्यमी केवल सैकड़ों ग्राहकों तक ही पहुँच रखते हैं, जबकि देश की जनसंख्या एक अरब से अधिक है। मानव संसाधन, मार्केटिंग, फाइनेंस, सेल्स, एडमिनिस्ट्रेशन और आईटी जैसी आवश्यक स्किल्स सिखाने वाले कोई उद्यमिता स्कूल नहीं हैं।
4. देश की मुद्रा को मज़बूत बनाना: देश में उद्यमिता की नीतियाँ नहीं हैं, शिक्षित युवाओं के लिए कोई सहायता निधि नहीं है,
सभी बच्चों के लिए समान शिक्षा की व्यवस्था नहीं है, उद्यमिता स्कूल नहीं हैं — इन सबके कारण भारत गरीबी की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री जी को यह भी जानकारी नहीं कि देश की कुल आय का 10% कितना होता है और कैसे उसे उद्यमिता में लगाया जा सकता है। क्या ऐसे प्रधानमंत्री रुपया मजबूत कर सकते हैं या देश को और गहराई में ले जाएंगे?
IFWC क्या कर रहा है?
देश की 10% आय को उद्यमिता के लिए समर्पित करने के लिए कार्य कर रहा है। हर क्षेत्र में उद्यमिता स्कूल खोलने का लक्ष्य है, ताकि स्थानीय ज़रूरतें पूरी हो सकें। प्रत्येक बच्चे को समान शिक्षा — चाहे वह अमीर हो या गरीब। नई नीतियों के ज़रिए हर नागरिक को देश की सफलता में भागीदार बनाना।
हमारा आह्वान: उद्यमिता के लिए पंजीकरण करें, स्वयं को एक उद्यमी बनने की शपथ दें। देश को गरीबी से मुक्त करें, रुपये का मूल्य बढ़ाएँ, और देश को समृद्ध बनाएं। हम स्वयंसेवकों की तलाश में हैं — जो पूरे देश में जागरूकता फैलाएँ,
उद्यमिता को अपनाएं, और एक शिक्षित युवा सरकार का हिस्सा बनें। हमें लिखें: hr[at]ifwc.co.in आइए मिलकर भारत को फिर से गौरवशाली और समृद्ध राष्ट्र बनाएं।
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