क्या भारत को वर्तमान सरकार में आर्थिक स्वतंत्रता मिल पाएगी

क्या भारत को वर्तमान सरकार में आर्थिक स्वतंत्रता मिल पाएगी

जब भारत को स्वतंत्रता मिली थी, तब 1 भारतीय रुपया = 1 अमेरिकी डॉलर के बराबर था। लेकिन वर्षों से सरकारें लगातार देश के संसाधन और बाज़ार दूसरे देशों को आउटसोर्स करती रही हैं। आज भारत में 60% से अधिक उत्पाद और सेवाओं में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का बोलबाला है। सरकार देश में उद्यमशीलता (Entrepreneurship) को बढ़ाने में असफल रही है, जिसका लाभ अन्य देशों को मिला और उनकी मुद्राएं मज़बूत होती गईं, जबकि भारतीय रुपया गिरता चला गया।

वर्तमान प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों को टैक्स के बदले देश बेच रहे हैं, जिससे देश चलाया जा सके, लेकिन इससे न तो उद्यमिता बढ़ रही है, न ही गरीबी कम हो रही है। एक बर्गर का वैश्विक बाज़ार ट्रिलियन डॉलर में है, और केवल भारत में इसका बाज़ार 15,000 करोड़ रुपये का है। बावजूद इसके, अगर मौजूदा प्रधानमंत्री को बर्गर बनाने की रेसिपी भी दे दें तो रुपये की कीमत ऊपर नहीं ले जा पाएंगे।

एक मोची, जो जूते ठीक करने पर 6 महीने की गारंटी देता है, बेहतरीन एक्सेसरीज़ इस्तेमाल करता है और समय पर डिलीवरी करता है, अगर वह प्रधानमंत्री से अपने कारोबार को बढ़ाने की मदद माँगे तो उन्हें कोई सहायता नहीं मिलती। क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री HR, मार्केटिंग, फाइनेंस, सेल्स, एडमिनिस्ट्रेशन या IT में शिक्षित नहीं हैं। उद्यमिता बढ़ाने में असमर्थ यह सरकार देश की गरीबी को लगातार बढ़ा रही है, जिससे हमारे पढ़े-लिखे युवा अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के लिए काम कर रहे हैं, न कि अपने देश के लिए।

देश में महानगरों, शहरों और गांवों के बीच शिक्षा की भारी खाई है। गांवों में लोग यह भी नहीं जानते कि कंप्यूटर उनके लिए क्या कर सकता है, वे वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह कटे हुए हैं। देश के लाखों बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कंप्यूटर देखा ही नहीं, फिर उनसे हम कैसे उम्मीद करें कि वे दुनिया से जुड़ें और देश की तरक्की में भाग लें?

आज देश के ज्यादातर उद्यमी कुछ सैकड़ों ग्राहकों तक ही सीमित हैं, जबकि देश की जनसंख्या 100 करोड़ से अधिक है। भारत में न तो पर्याप्त उद्यमिता है, न ही शिक्षा, और न ही हम वैश्विक समस्याओं का समाधान बनाकर अन्य देशों को दे पा रहे हैं। दूसरी ओर, विदेशी उद्यमियों के पास हर सेक्टर में अपने उत्पाद और सेवाएं हैं, और वे अपने देश में ही नहीं बल्कि भारत में भी उन्हें पूरे देशभर में उपलब्ध करा पा रहे हैं — जिससे उनकी मुद्रा मजबूत होती जा रही है।

वर्तमान सरकार देश में उद्यमशीलता नहीं बढ़ा पा रही है, और जब तक ऐसा नहीं होता भारत को आर्थिक स्वतंत्रता नहीं मिल सकती। भारत को एक ऐसा प्रधानमंत्री चाहिए जो देश के लिए उद्यमशीलता बढ़ाए और समृद्धि लेकर आए। आज देश में न तो उद्यमिता नीति है, न उद्यमिता के लिए कोई फंड, न ही स्थानीय व्यापारों को सिखाने के लिए उद्यमिता स्कूल। ऐसे में देश में गरीबी बढ़ती जा रही है, और प्रधानमंत्री की शिक्षा और दृष्टिकोण रुपये का मूल्य ऊपर ले जाने में असफल हो रहा है।

हमारा आह्वान: उद्यमिता के लिए रजिस्टर करें, एक शपथ लें कि हम देश के लिए उद्यमी बनेंगे। आइए रुपये का मूल्य ऊपर ले जाएं, गरीबी हटाएं, और देश में उद्यमशीलता बढ़ाएं। हमें लिखें: pledges[at]ifwc.co.in आपका हर पंजीकरण देश भर में जागरूकता फैलाने और गरीबी मिटाने के लिए उद्यमिता फंड प्रदान करने में प्रयोग किया जाता है।

IFWC का लक्ष्य: देश की 10% आय को उद्यमिता में निवेश करना। हर गांव, शहर और महानगर में उद्यमिता स्कूल खोलना ताकि स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। उत्पादों और सेवाओं में उद्यमशीलता बढ़ाना। गरीब और अमीर सभी बच्चों को समान शिक्षा देना। ऐसी उद्यमिता नीतियां बनाना जिससे देश का हर नागरिक देश की सफलता में भागीदार बन सके। आइए मिलकर देश को फिर से समृद्ध और गर्व का स्थान बनाएं।

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