5 कारण क्यों वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री रुपये की कीमत नहीं बढ़ा सकते

5 कारण क्यों वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री रुपये की कीमत नहीं बढ़ा सकते

गरीबी के असली कारणों को नहीं समझते
वर्तमान सरकार कह रही है कि देश में गरीबी महंगाई, व्यापार घाटा और बजट घाटे के कारण है, जबकि ये गरीबी के परिणाम हैं, कारण नहीं। सरकार दूसरी ओर यह भी कहती है कि GDP बढ़ रही है, जबकि यह बढ़ोतरी केवल देश की जनसंख्या और खपत की वजह से हो रही है। असल में विदेशी ब्रांड्स हमारे देश में मुनाफा कमा रहे हैं, और भारतीय रुपया हर दिन कमजोर हो रहा है। गरीबी का असली कारण है – देश में उद्यमिता की कमी, जिससे हम अपनी ज़रूरतों को भी खुद पूरा नहीं कर पा रहे।

वित्त और अर्थशास्त्र में अनुभव की कमी
वर्तमान प्रधानमंत्री को वित्त और अर्थशास्त्र का औपचारिक ज्ञान नहीं है। देश को चलाने के लिए वे केवल कर वसूली और सार्वजनिक संपत्तियों की बिक्री पर निर्भर हैं। जबकि भारत में उद्यमिता का स्तर इतना कम है कि वह देश की ज़रूरतों को पूरा करने में भी असमर्थ है। विदेशी उद्यमी हमारे देश में करोड़ों ग्राहकों को सेवा दे रहे हैं, जबकि हमारी सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने में विफल है।

उद्यमिता के महत्व को नहीं समझते
अगर वर्तमान प्रधानमंत्री को बर्गर बनाने की रेसिपी भी दे दी जाए — जो एक ट्रिलियन डॉलर का वैश्विक बाज़ार है — तब भी वे उससे रुपये की कीमत नहीं बढ़ा पाएँगे, क्योंकि उन्हें यह समझ ही नहीं है कि कैसे छोटे-छोटे व्यवसाय भी देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकते हैं। बर्गर, पैटीज़, बन, सॉस — यह सब मिलकर एक बड़ा वैश्विक बाज़ार बनाते हैं, लेकिन बिना शिक्षा और उद्यमशीलता को बढ़ावा दिए हम इसका लाभ नहीं उठा सकते।

देश की आमदनी का 10% उद्यमिता के लिए नहीं दे सकते
क्या वर्तमान प्रधानमंत्री देश की आमदनी का 10% उद्यमिता के लिए आवंटित कर सकते हैं? क्या सरकार देश की आय और खर्चों की सही बहीखाता रखती है ताकि योजनाबद्ध ढंग से विकास किया जा सके? जब तक हम हर क्षेत्र में उद्यमिता को नहीं बढ़ाएँगे, हम केवल दूसरे देशों के उद्यमियों को लाभ पहुंचाते रहेंगे, जो हमारे देश से कमाकर अपने देश की अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहे हैं।

सार्वजनिक सेवाओं में गुणवत्ता नहीं दे पा रहे
क्या वर्तमान प्रधानमंत्री सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता सुधार सकते हैं ताकि उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके? जब तक आम नागरिकों को समान रूप से गुणवत्ता नहीं मिलेगी, तब तक उद्यमिता में वृद्धि नहीं होगी और जब तक उद्यमिता नहीं बढ़ेगी, तब तक गरीबी नहीं मिटेगी और रुपया मजबूत नहीं होगा।

IFWC का समाधान India First World Country (IFWC) इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है: देश की 10% आय उद्यमिता में निवेश करने का लक्ष्य। पूरे देश में उद्यमिता विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं ताकि स्थानीय आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। सभी बच्चों को – चाहे वे अमीर हों या गरीब, गाँव में हों या शहर में – समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाएगी। ऐसी नीतियाँ लाई जा रही हैं जिससे हर नागरिक देश की सफलता में भागीदार बन सके और भारत फिर से समृद्ध बन सके।

IFWC एक राजनीतिक दल है, जिसका पंजीकरण भारत के निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली में कराया गया है, लेकिन अभी तक न तो हमारे पंजीकरण की स्थिति की जानकारी दी गई है और न ही किसी अन्य दल का घोषणा-पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया गया है।

भारत को फिर से समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें। हमें लिखें: pledges[at]ifwc.co.in हमारी टीम आपसे संपर्क करेगी और संकल्प पंजीकरण में सहायता करेगी।आइए, भारत को एक फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री बनाएं — सबके लिए।

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