राष्ट्रपति जी का राष्ट्र के नाम संबोधन – 15 अगस्त 2025, भाग द्वितीय

राष्ट्रपति जी का राष्ट्र के नाम संबोधन – 15 अगस्त 2025, भाग द्वितीय

हमारे देश के राष्ट्रपति जी ने 15 अगस्त को गर्व के साथ राष्ट्र को संबोधित किया, जबकि उन्होंने अब तक अपने पद की शपथ का पालन करते हुए देश में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अन्याय के संबंध में भेजे गए पत्र का उत्तर नहीं दिया। यह राष्ट्र के नाम संबोधन का दूसरा भाग है। पहला भाग पढ़ें

राष्ट्रपति जी, आपके बताए गए अच्छे शासन के बावजूद हमारे देश में 60% से अधिक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का दबदबा है। वर्तमान प्रधानमंत्री लगातार इन अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को बढ़ावा दे रहे हैं, जिसकी वजह से हमारी मुद्रा (रुपये) का मूल्य लगातार गिर रहा है और देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। सरकार भले ही कल्याणकारी योजनाएँ चला रही हो, लेकिन देश में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में पूरी तरह असफल रही है। आज हमारे देश में केवल वही लोग अच्छा कमा रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के लिए काम कर रहे हैं। इसके विपरीत, जो लोग देश के लिए काम कर रहे हैं, रुपये की कीमत लगातार गिरने के कारण उनकी आमदनी और भी कम होती जा रही है। यही एक बड़ा कारण है कि हमारे देश के किसान सबसे कम कमाई करते हैं।

राष्ट्रपति जी, हम 1.2 अरब की जनसंख्या वाला देश हैं, जहाँ 10 करोड़ से अधिक छोटे व्यवसाय हैं, लेकिन उनके लिए उद्यमिता का कोई ठोस सहयोग नहीं है। यही कारण है कि वे देश में पर्याप्त रोजगार सृजित नहीं कर पा रहे हैं। हमारे गाँवों, महानगरों और शहरों में बुनियादी ढाँचे की भारी असमानता है। राष्ट्रीय राजमार्गों को मज़बूत किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय उत्पाद पूरे देश में आसानी से पहुँच सकें, जबकि जहाँ हमारे देश के लोग रहते हैं वहाँ आज भी बुनियादी ढाँचे का अभाव है।

राष्ट्रपति जी, लोग जिन नौकरियों के लिए यात्रा कर रहे हैं, वे अधिकांशतः अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स द्वारा दी गई नौकरियाँ हैं, जबकि स्थानीय लोग हमारी गिरती हुई रुपये की क़ीमत के कारण और कम कमाई कर रहे हैं। गाँवों में रोजगार न होने से लोग शहरों और महानगरों की ओर जाते हैं, लेकिन वहाँ भी जब रोजगार नहीं मिलता तो उनके बच्चे सड़कों पर काम करने को मजबूर हो जाते हैं। शिक्षित परिवारों के लिए, अपने बच्चों को सड़कों पर काम करते देखना शोषण है, लेकिन जब हमारे देश की 60% से अधिक आबादी गरीबी में जी रही है और उनके बच्चे शिक्षा या आर्थिक भविष्य के बिना सड़कों पर काम करने को मजबूर हैं, तो क्या यह शोषण नहीं है? जबकि हमारा संविधान स्पष्ट रूप से इसके विपरीत कहता है।

राष्ट्रपति जी, हमारी नदियाँ जो कभी लबालब बहती थीं, आज देश में सूख चुकी हैं।

राष्ट्रपति जी, कोई भी शिक्षित व्यक्ति आज सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जाना नहीं चाहता, क्योंकि वहाँ की बुनियादी ढाँचा और सुविधाएँ बेहद खराब हैं। सरकार लोगों से कहती है कि स्वास्थ्य सेवाएँ निःशुल्क हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि इतनी बड़ी जनसंख्या के बावजूद सरकारी संस्थानों में मरीजों को ठीक से देखा तक नहीं जाता। प्रथम विश्व देशों में हर नागरिक गर्व से सरकारी अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेता है और वहाँ की सरकारें अपने स्वास्थ्य तंत्र को टेलीविज़न सीरीज़, फ़िल्मों और अन्य माध्यमों से गर्वपूर्वक प्रचारित करती हैं। अगर हम भी ऐसा कर पाते और हमारी स्वास्थ्य सेवाएँ सच में इतनी सक्षम होतीं, तो प्रथम विश्व देशों के लोग गर्व से भारत आकर हमारे सरकारी संस्थानों में इलाज करवाना पसंद करते। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि हमारे नागरिक भी अपने ही देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से कतराते हैं और मजबूरी में निजी संस्थानों या फिर विदेशों का रुख करते हैं।

राष्ट्रपति जी, जहाँ एक ओर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी को अपना रहे हैं, वहीं अधिकांश आईटी कंपनियाँ अंतरराष्ट्रीय सेवाएँ विकसित करने के लिए काम कर रही हैं। 4G सेवाएँ प्रदान करने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के हैं, जिनमें 60% से अधिक हिस्सेदारी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की है और केवल 40% भारतीय ब्रांड्स की। आप कहते हैं कि विश्व में होने वाले कुल डिजिटल लेन-देन का आधे से अधिक हिस्सा भारत में होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि देश में कितने बड़े पैमाने पर ऑफ़लाइन लेन-देन होते हैं? यही ऑफ़लाइन लेन-देन हमारे देश में बढ़ते भ्रष्टाचार का एक मुख्य कारण हैं।

क्या राष्ट्रपति जी को देश में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अन्याय से राष्ट्र की रक्षा करने हेतु अपनी शपथ का पालन करने के लिए भेजे गए पत्र का उत्तर देना चाहिए? आगे पढ़ें…

.

Related Articles

हमारे देश में लगभग 60% लोग गरीबी में जी रहे हैं (In our country about 60% of people are living in poverty)#RegisterPledge #RemovePoverty #IncreaseEntrepreneurship
https://buff.ly/ndq1XVK

देशों की सफलता में सहायता के लिए देशों के राजस्व के लिए शेयर प्राप्त करें (Get shares for countries revenue to help in countries success)

IFWC देश में उद्यमिता के लिए 10% देशों को राजस्व प्रदान करने के लिए काम कर रहा है (IFWC is working to provide 10% of countries revenue for entrepreneurship in the country)#Metropolitan #OtherParties #Villages #IncreaseEntreprenuership

हम देश से गरीबी हटाने के लिए स्वयंसेवकों की तलाश कर रहे हैं (We are looking for volunteers for removing poverty from the country)#TakeRupeeUp #TakeRupeeUp #India #IFWC
https://buff.ly/zOxvbsS